बुधवार, 18 मार्च 2026

संवत २०८३ संवत्सर फल

                 ।। ॐ।।

     ।।श्री गणेशाय नमः।। 

       ।। संवत्सर फल ।।

श्री संवत् २०८३ वर्ष रौद्र नामक संवत्सर रहेगा । रौद्र नामक संवत्सर का वर्ष पर्यंत संकल्प में विनियोग करना चाहिए । इस वर्ष राजा गुरु व  मंत्री मंगल है । राजा वह मंत्री में परस्पर मैत्री भाव होने से शासक वर्ग प्रजा तथा पशु पक्षी आदि सुखी रहेंगे। व्यापारी वर्ग आदि के लिए शुभ फलदायक रहेगा । अधिकतर लोगों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा । यह रौद्र नामक संवत्सर अनेक समस्याओं को पैदा कर सकता है। अनेक देशों में विद्रोह होगा । जन धन की हानि होगी। विश्व व्यापार मैं परिवर्तन हो सकता है। महंगाई की स्थिति उभर सकती है। आतंकवाद वह उग्रवाद से विश्व में अनेक प्रकार की दुर्घटनाएं तथा विस्फोटक सामग्रियों से जनधन की हानि हो सकती है। अनेक देशों के सीमाओं पर सैन्य संघर्ष  से क्षति होगी। कहीं कहीं पर चक्रवात तूफान का तथा प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है। 

राजा गुरु --


राजा गुरु होने से वर्षा अच्छी होगी बुद्धिमान लोग नित्य धर्म कार्य में रत रहेंगे और अनेक प्रकार के धार्मिक उत्सव देखने को मिलेंगे।


मंत्री मंगल --


मंगल के मंत्री होने से लोग बीमारियों से दुखी । किन्तु गयो में दूध अधिक होने से धर्म में तत्पर लोग सुखी रहेंगे ।


विषुवत संक्रांति फल--


जिन जातकों का जन्म नक्षत्र पूर्वाभाद्रपदा , उत्तराभाद्रपदा ,रेवती है । उन्हें विषुवत संक्रांति बाम पाद में है । 

अरिष्ट निवारण के लिए चांदी का पद दान करें ।  लाल कपड़ा ,सफेद कपड़ा, दही ,अन्न दान करें ।

चंद्रबल --

मेष सिंह धनु राशि वाले जातकों को विषुवत संक्रांति ( १ गते बैशाख) के दिन  कर्क , वृश्चिक, में राशि के जातकों को चंद्रमा प्रतिकूल ( अपैट ) हैं । शांति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करावे मोती चांदी चावल दही की श्वेत वस्त्र दक्षिणा आदि श्रद्धा पूर्वक दान करें । 

शनि की साढ़ेसाती और ढैया --


कुंभ मीन मेष राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा ।

सिंह और धनु राशि वालों को शनि की ढैया रहेगी ।

मेष राशि वालों के सिर पर ,

मीन राशि वालों के हृदय पर, 

कुंभ राशि वालों के पैर पर, शनि का स्थान रहेगा ।

शनि के प्रभाव से बचने के लिए सुंदरकांड का पाठ हनुमान चालीसा का पाठ और शनिवार के दिन तेल, काला कपड़ा, उड़द , लोहा दान देने से शनि का प्रभाव खत्म होता है।

आचार्य हरीश चंद्र लखेड़ा 
      9004013983
             मुंबई 




रविवार, 18 जनवरी 2026

प्राण प्रतिष्ठा क्रम

मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का क्रम (संक्षेप में पूर्ण विधि)
मंदिर में देव-प्रतिमा की प्रतिष्ठा शास्त्रसम्मत विधि से होती है। सामान्यतः क्रम इस प्रकार होता है—
1️⃣ भूमि शुद्धि एवं वास्तु शांति
भूमि पूजन
वास्तु दोष निवारण
पंचगव्य से शुद्धि
2️⃣ अंकुरारोपण (बीज बोना)
शुभ मुहूर्त में जौ आदि का अंकुरण
यह यज्ञ की सिद्धि का संकेत माना जाता है
3️⃣ मंडप प्रवेश एवं देव आवाहन
यज्ञ मंडप की स्थापना
गणपति पूजन
नवग्रह पूजन
4️⃣ अग्नि स्थापना (हवन प्रारंभ)
वैदिक मंत्रों से अग्नि प्रज्वलन
मुख्य हवन प्रारंभ
5️⃣ जलाधिवास
प्रतिमा को पवित्र जल में स्थापित करना
नदियों, तीर्थों के जल का प्रयोग
6️⃣ धान्याधिवास
प्रतिमा को अन्न (धान, गेहूं आदि) में रखना
7️⃣ पुष्पाधिवास
प्रतिमा को पुष्पों के बीच रखना
8️⃣ शय्याधिवास
प्रतिमा को विश्राम हेतु शय्या पर रखना
9️⃣ नेत्रोन्मीलन (नेत्र खोलना)
स्वर्ण या चांदी की शलाका से नेत्र उद्घाटन
यही सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है
🔟 प्राण-प्रतिष्ठा
मंत्रों द्वारा देवता में प्राण तत्व की स्थापना
इसके बाद प्रतिमा सजीव देव स्वरूप मानी जाती है
1️⃣1️⃣ अभिषेक
पंचामृत, जल, गंगाजल से महाअभिषेक
1️⃣2️⃣ श्रृंगार एवं वस्त्र धारण
वस्त्र, आभूषण, चंदन, पुष्प अर्पण
1️⃣3️⃣ महाआरती एवं भोग
पूर्ण आहुति
देवता को भोग
महाआरती
1️⃣4️⃣ ब्राह्मण भोज एवं दक्षिणा
ब्राह्मणों को भोजन
दान-दक्षिणा

संवत २०८३ संवत्सर फल

                  ।। ॐ।।      ।।श्री गणेशाय नमः।।         ।। संवत्सर फल ।। श्री संवत् २०८३ वर्ष रौद्र नामक संवत्सर रहेगा । रौद्र नामक संवत्स...