गुरुवार, 26 मार्च 2026
चंद्र ग्रहण 20 अगस्त 2026
चंद्र ग्रहण --
श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को लगने वाला खंड चन्द्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण अंटार्कटिका, अफ्रीका ,एशिया, यूरोप ,हिंद महासागर ,अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर में दिखाई देगा।
1 - चंद्रास्त के समय ग्रहण का प्रारंभ यूक्रेन ,तुर्की ,सऊदी अरब ,यमन ,मेडागास्कर, रूस का पूर्वी भाग, हिंद महासागर और अफ्रीका के पूर्वी भाग में दिखाई देगा।
२ - चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंत अलास्का ,न्यूजीलैंड और प्रशांत महासागर के कुछ भाग में दिखाई देगा।
भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का प्रारंभ दिन में 8:04 am पर मोक्ष दिन 11:22 am पर होगा।
सूर्य ग्रहण 06 फरवरी 2027
सूर्य ग्रहण --
माघ कृष्ण पक्ष अमावस्या शनिवार 6 फरवरी 2027 को लगने वाला कंकणा कृति सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका पश्चिम और दक्षिण अफ्रीका ,अटलांटिक महासागर ,प्रशांत महासागर में दिखाई देगा।
भारतीय मानक समय अनुसार ग्रहण का प्रारंभ सायं 6:28 पर तथा मोक्ष रात्रि में 12:32 पर होगा।
बुधवार, 18 मार्च 2026
संवत २०८३ संवत्सर फल
।। ॐ।।
।।श्री गणेशाय नमः।।
।। संवत्सर फल ।।
श्री संवत् २०८३ वर्ष रौद्र नामक संवत्सर रहेगा । रौद्र नामक संवत्सर का वर्ष पर्यंत संकल्प में विनियोग करना चाहिए । इस वर्ष राजा गुरु व मंत्री मंगल है । राजा वह मंत्री में परस्पर मैत्री भाव होने से शासक वर्ग प्रजा तथा पशु पक्षी आदि सुखी रहेंगे। व्यापारी वर्ग आदि के लिए शुभ फलदायक रहेगा । अधिकतर लोगों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा । यह रौद्र नामक संवत्सर अनेक समस्याओं को पैदा कर सकता है। अनेक देशों में विद्रोह होगा । जन धन की हानि होगी। विश्व व्यापार मैं परिवर्तन हो सकता है। महंगाई की स्थिति उभर सकती है। आतंकवाद वह उग्रवाद से विश्व में अनेक प्रकार की दुर्घटनाएं तथा विस्फोटक सामग्रियों से जनधन की हानि हो सकती है। अनेक देशों के सीमाओं पर सैन्य संघर्ष से क्षति होगी। कहीं कहीं पर चक्रवात तूफान का तथा प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है।
राजा गुरु --
राजा गुरु होने से वर्षा अच्छी होगी बुद्धिमान लोग नित्य धर्म कार्य में रत रहेंगे और अनेक प्रकार के धार्मिक उत्सव देखने को मिलेंगे।
मंत्री मंगल --
मंगल के मंत्री होने से लोग बीमारियों से दुखी । किन्तु गयो में दूध अधिक होने से धर्म में तत्पर लोग सुखी रहेंगे ।
विषुवत संक्रांति फल--
जिन जातकों का जन्म नक्षत्र पूर्वाभाद्रपदा , उत्तराभाद्रपदा ,रेवती है । उन्हें विषुवत संक्रांति बाम पाद में है ।
अरिष्ट निवारण के लिए चांदी का पद दान करें । लाल कपड़ा ,सफेद कपड़ा, दही ,अन्न दान करें ।
चंद्रबल --
मेष सिंह धनु राशि वाले जातकों को विषुवत संक्रांति ( १ गते बैशाख) के दिन कर्क , वृश्चिक, में राशि के जातकों को चंद्रमा प्रतिकूल ( अपैट ) हैं । शांति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करावे मोती चांदी चावल दही की श्वेत वस्त्र दक्षिणा आदि श्रद्धा पूर्वक दान करें ।
शनि की साढ़ेसाती और ढैया --
कुंभ मीन मेष राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा ।
सिंह और धनु राशि वालों को शनि की ढैया रहेगी ।
मेष राशि वालों के सिर पर ,
मीन राशि वालों के हृदय पर,
कुंभ राशि वालों के पैर पर, शनि का स्थान रहेगा ।
शनि के प्रभाव से बचने के लिए सुंदरकांड का पाठ हनुमान चालीसा का पाठ और शनिवार के दिन तेल, काला कपड़ा, उड़द , लोहा दान देने से शनि का प्रभाव खत्म होता है।
आचार्य हरीश चंद्र लखेड़ा
9004013983
मुंबई
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