ब्राह्मण जो ब्रह्म का ज्ञान रखता है । वह ब्राह्मण है ।
जो सृष्टि का ज्ञान रखता है । वह ब्राह्मण है ।
जो वेदों का ज्ञान रखता है । वह ब्राह्मण है ।
जो पुराणों का ज्ञान रखता है। वह ब्रह्मण है।
जो नियमों पर चलता है । वह ब्राह्मण है ।
जिसके पास ज्ञान का भंडार है । वह ब्राह्मण है ।
जो समाज को ज्ञान देने का काम करता है । वह ब्राह्मण है ।
जो समाज को जीने की कला सिखाता है। वह ब्राह्मण है ।
जो गुरु परंपरा पर चलता है । वह ब्राह्मण है ।
वेद, पुराण उपनिषद ,ज्योतिष वास्तु आयुर्वेद सनातन संस्कृति संस्कारों की रक्षा करने वाला,वह है ब्राह्मण ।
अपनी परम्पराओं ज्ञान देना वाला है । ब्राह्मण।
जिससे देवता भी डरते है । वह है ब्राह्मण ।
सनातन को जिंदा रखने वाला वह ब्राह्मण है ।
नाम सुनकर ऐसा लगता है जैसे कोई दीनहीन होगा । लोगों की भावना ब्राह्मण नाम सुनकर परिवर्तित हो जाती है । कई लोग तो आदर करते हैं, और कई लोग तिरस्कार भी करते हैं।
पृथ्वी में जितने भी तीर्थ पवित्र नदियां है , वे सभी समुद्र में मिलते है । और समुद्र के सारे तीर्थ ब्राह्मण के दाहिने पैर में बसते है ।
देवाधीनं जगत्सर्वं मंत्राधीनाश्च देवता:।
तेमंत्रा: ब्राह्मणाधिना: तस्मात् ब्राह्मण देवता: । ।
सारा संसार देवताओं के अधीन है । और देवता मन्त्रों के अधीन है । मंत्र ब्राह्मण के अधीन है । इस लिए इस वसुंधरा के ब्राह्मण ही देवता है ।
ब्राह्मण कि यारी ,शेर की सवारी
जिसने ब्राह्मण को मित्र बना लिया समझो उसने शेर कि सवारी कर ली ।